रविवार, 13 फ़रवरी 2011

इस मौसम में


हवा
जब भी गुज़रती है
सरसों के खेत से होकर
दो चार पीले फूल टंग जाते हैं
उसकी कमीज़ के बटन में
और पीठ पर गूंजती दिखती है
एक भीनी भीनी सी थाप

इन रंगों और खुशबुओं की उम्र
कोई बहुत ज्यादा तो नहीं
मगर सूखे मौसमों के दौर में
आँखों में उतार लेंगे वो पीली सुगंध
छाती भर सांस
कुछ कदम और चलने का हौसला देगी

11 टिप्‍पणियां:

  1. इन रंगों और खुशबुओं की उम्र
    कोई बहुत ज्यादा तो नहीं
    मगर सूखे मौसमों के दौर में
    आँखों में उतार लेंगे वो पीली सुगंध
    छाती भर सांस
    कुछ कदम और चलने का हौसला देगी...bahut badhiyaa

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  2. भाई चैन सिंह जी,
    वाह जी,वाह !
    क्या गज़ब लिखते हो !
    बधाई !

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  3. आज के दिन इस मौसम के साथ इश्क हों गया है.. बहुत सोलिड लिखते हों बॉस..खूब...

    मनोज

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  4. मगर सूखे मौसमों के दौर में
    आँखों में उतार लेंगे वो पीली सुगंध
    छाती भर सांस
    कुछ कदम और चलने का हौसला देगी

    सही कह रहे हैं……………बेहद भावभीनी प्रस्तुति।

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  5. इन रंगों और खुशबुओं की उम्र
    कोई बहुत ज्यादा तो नहीं
    मगर सूखे मौसमों के दौर में
    आँखों में उतार लेंगे वो पीली सुगंध
    छाती भर सांस
    कुछ कदम और चलने का हौसला देगी

    sundar abhivyakti! man ko chuti hai !

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  6. इन रंगों और खुशबुओं की उम्र
    कोई बहुत ज्यादा तो नहीं
    मगर सूखे मौसमों के दौर में
    आँखों में उतार लेंगे वो पीली सुगंध
    छाती भर सांस
    कुछ कदम और चलने का हौसला देगी

    आम सी पंक्तियाँ जिन्हें सुंदर शब्द देकर आपने ख़ास बना दिया है..... सुंदर चित्रण
    बहुत अच्छी लगी रचना

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  7. बहुत खूब! बहुत सुन्दर|धन्यवाद|

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  8. आपका शब्द चयन व्यवस्थित और सरल प्रवाहमय रहा ! !आप कामयाब हैं ....शुभकामनायें !!

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