शनिवार, 25 दिसंबर 2010

रात की बात


धुंधियाए आकाश के आईने में
चाँद उदास दिखता है

अंधेरों से दामन छुड़ा कर
रात ने छिटकी तारों जड़ी चूनर
सुखाने डाल दी आकाश की अलगनी पर

यादों के मिटने का वक़्त है
रात के साये
चाँद के मफलर से लिपटे
उदासी के रंग को गहरा कर रहे

6 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिय बंधुवर चैन सिंह शेखावत जी
    नमस्कार !

    धुंधियाए आकाश के आईने में
    चांद उदास दिखता है …
    वाह ! नये बिंबों को ले'कर आधुनिक भाव बोध की सुंदर रचना के लिए बधाई !

    ~*~नव वर्ष 2011 के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं !~*~

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  2. बहुत खूबसूरत ख़याल ..तारों जड़ी चुनर और चाँद का मफलर ..अच्छा लगा

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  3. .

    बहुत ही खूबसूरत रचना..छोटी लेकिन कमाल की है.. इन दिनों कुछ उदासी ??!!

    मनोज

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  4. अंधेरों से दामन छुड़ा कर
    रात ने छिटकी तारों जड़ी चूनर
    सुखाने डाल दी आकाश की अलगनी पर

    बहुत खूब ....!!

    नववर्ष की शुभकामनाएं ......!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. चैन सिंह शेखावत जी
    नमस्कार !

    धुंधियाए आकाश के आईने में
    चांद उदास दिखता है …
    वाह ! नये बिंबों को ले'कर आधुनिक भाव बोध की सुंदर रचना के लिए बधाई !

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